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एमबीबीएस डॉक्टरों का पीजी में आरक्षण खत्म होने के विरोध में एक घंटे मरीजों का ओपीडी में उपचार नहीं
उज्जैन । एमबीबीएस डॉक्टरों का पीजी में आरक्षण खत्म होने के विरोध में चिकित्सा अधिकारी संघ के पदाधिकारी, सदस्यों व डॉक्टरों ने बुधवार सुबह 10 से 11 बजे तक चिकित्सा सेवाएं नहीं दी। जिला अस्पताल व माधवनगर सहित जिले के सरकारी अस्पतालों में 80 से ज्यादा मरीजों को ओपीडी में इलाज नहीं मिल पाया। आगे भी उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।
पहले शासकीय मेडिकल ऑफिसर्स को पीजी में 50 आरक्षण था। ग्रामीण में पांच वर्ष तक सेवाएं देने पर 10 अंक अलग से दिए जाते थे लेकिन नए नियमों के तहत प्रदेश के 10 जिलों के 89 क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सकों को ही आरक्षण देने का प्रावधान दिया है। बाकी को आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा रहा है। जिले में ऐसे 22 डॉक्टर प्रभावित हुए हैं। पीजी में आरक्षण खत्म किए जाने के आदेश के विरोध में 4 अप्रैल से डॉक्टर काली पट्टी बांधकर कार्य कर रहे हैं। बुधवार को उन्होंने पेन डाउन हड़ताल कर दी। सुबह 10 से 11 बजे तक ओपीडी में चिकित्सा सेवाएं नहीं दी। इसका असर जिला अस्पताल, माधवनगर अस्पताल, जीवाजीगंज अस्पताल सहित जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में पड़ा है। इस दौरान 80 मरीज विभिन्न अस्पतालों में पहुंचे थे लेकिन उन्हें ओपीडी में इलाज नहीं मिल पाया। हालांकि चिकित्सा अधिकारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि इमरजेंसी सेवाएं जारी रखी थी। गंभीर मरीजों को इमरजेंसी विभाग में उपचार दिया गया।
आज भी ओपीडी में एक घंटे इलाज नहीं करेंगे
चिकित्सा अधिकारी संघ के प्रांतीय सहसचिव डॉ.रौनक एलची ने बताया कि आरक्षण खत्म करने के विरोध में पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में एक घंटे तक चिकित्सा सेवाएं बंद की है। गुरुवार को भी सुबह 10 से 11 बजे तक ओपीडी में इलाज नहीं करेंगे।
सीट निर्धारित करें या नंबर दिए जाए
डॉक्टरों की मांग है कि पीजी में कुछ प्रतिशत सीट निर्धारित की जाए या फिर कुछ नंबर दिए जाए। गांव व शहरों में काम करने वाले चिकित्सक इस सेवा से वंचित हो रहे हैं। सेवा में रहते हुए चिकित्सकों को पीजी दी जाए, इसमें वह 5 साल तक सरकारी अस्पताल में काम करेंगे। इससे डॉक्टरों की जो कमी है वह पूरी हो जाएगी एवं मरीजों को विशेषज्ञों की सुविधाएं मिल सकेगी।